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Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full

| क्रम | स्थान | आध्यात्मिक लाभ | |------|--------|------------------| | 1 | मूलनायक | क्रोध का नाश | | 2 | कुमारपाल टेक | मान (अहंकार) का नाश | | 3 | आनंदसागर | माया (छल) का नाश | | 4 | भक्ति भवन | लोभ का नाश | | 5 | मोक्ष टेक | पाँचों कषायों का पूर्ण क्षय |

थोड़ी देर चढ़ाई के बाद एक समतल भूमि आती है। यहाँ तीसरी चैत्यवंदन की जाती है। यह विशेष है क्योंकि यहाँ हम सभी तीर्थंकरों को एक साथ नमन करते हैं।

कहानी के अनुसार, एक बार गुरु राजेंद्र सूरि ने यहाँ बैठकर 5 चैत्यवंदन का प्रवर्तन किया था। उन्होंने कहा: palitana 5 chaityavandan in hindi full

"भाई! चाहे तुम अमीर हो या गरीब, पंडित हो या मूर्ख, यहाँ समभूमि पर सब एक समान हैं। जैसे यह ज़मीन समतल है, वैसे ही समता का भाव रखो।"

तीसरी वंदना में श्रद्धालु ध्यान करता है- "सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखूं। सबको सुखी देखूं।" "भाई

पाँचों चैत्यवंदन पूरी होने के बाद, श्रद्धालु उतरते समय भी उसी भाव से उतरता है। वह सोचता है- "अब मैं वही व्यक्ति नहीं रहा जो सुबह चढ़ा था। मैं हल्का हो गया हूँ।"

कहानी के अंत में एक सत्य है- पालीताना की पाँच चैत्यवंदन केवल प्रार्थना नहीं, यह जीवन जीने की कला है। यह हमें सिखाती है: पंडित हो या मूर्ख

पालीताणा की 863 सीढ़ियाँ केवल शारीरिक तप नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान की सीढ़ियाँ हैं। यहाँ पाँच बार चैत्यवंदन करने की परंपरा आचार्य हेमचंद्रसूरी और कुमारपाल के समय से प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से पाँच चैत्यवंदन करता है, उसे पाँचों इंद्रियों के विकारों से मुक्ति मिलती है।